“कुच्छ लोगों की सुनतै है,तो किसी को लोग सुनते हैं।बात अगर तर्कसंगत हो,तो लोग उधर ही झुकते हैं।”

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“आरक्षण का सीधा मतलब- लोगों को धर्म और जाति के आधार पर बाटना और ईन्सानियत के नाम पर महज़ एक भेदभाव। अपवाद- अपंगता। इससे बेहतर है, कि लोगो को गुणवता और कीर्ति के आधार पर प्रोतसाहन भत्ता मिले ताकि लोग, अच्छे कामो के प्रति हमेशा सजग व जुझारू रहे।”